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स्वास्थ्य मिथकों का पर्दाफाश

हे! हमें ख़ुशी है कि आप यहाँ है और जब आप हमारे ब्लॉग को पढ़ रहे हैं तो यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम आपके साथ 100 प्रतिशत ईमानदार रहें | शुरू करने से पहले हम आपको बता दें कि सत्य आपको थोड़ा सा हर्ट कर सकता है इसलिए स्वयं को थोड़ा सा ब्रेस करें

माना जाता है कि “स्वस्थ और फायदेमंद” चीज़ों में अधिकांश माता-पिता ने यह बताया कि आप सब्जियाँ खाएं और स्वस्थ एवम् सक्रिय जीवन जियें | लेकिन जब हम कहते हैं कि स्वास्थ्य मिथक हमारे चारों ओर फैले हुए हैं और यह हमारे जीवन को मुश्किल बनाते हैं तो आप हमारा विश्वास करें ; तो अब हम यहाँ कुछ प्रचलित स्वास्थ्य मिथकों को तोड़ने के लिए हैं और इसके बारे में हमारे पास पुख्ता प्रमाण हैं |

मिथक : गाजर आपको अंधेरे में देखने में मदद करते हैं
सत्य : यह प्रपोगैंडा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान आया ; ब्रिटिश एयरफोर्स ने एक नई राडार तकनीकी विकसित की जिसने रात के समय जर्मन विमानों को ध्वस्त करने में पायलटों की सहायता की | लेकिन युद्ध के दिनों में दूसरी चीज़ों की तरह इस तकनीकी को गुप्त रखना तो तो ब्रिटिश सेना ने अपने बचाव में गाज़र का इस्तेमाल किया | युद्ध के दौरान विज्ञापनों में रात्रिकालीन दृष्टि के लिए गाज़र के लाभों को बताया जिसमें से एक “ गाज़र आपको स्वस्थ रखता है और आपको ब्लैकआउट के दौरान देखने में मदद करता है” था ; स्मिथसोनियन पत्रिका का कहना है कि गाज़र दृष्टि को बनाये रखने में मदद करता है लेकिन इस मिथक का समर्थन करने का कोई सबूत नहीं है कि यह दृष्टि और रात्रि में देखने की क्षमता को बढ़ाता है ; यहाँ तक कि खरगोश भी रात में नहीं देख सकता है |

मिथक : यदि आप च्यूइंगम निगलते हैं तो यह आपके सिस्टम में 7 सालों तक रहता है
सत्य : आइये इस मिथक को हम अपने सिर से थूक दें ( बाहर निकाल दें ) | हम सब कम से कम एक बार च्युइंगम निगल चुके हैं और अगर यह मिथक सच था तो पिछले 7 सालों में इसको निगलने वाले हर व्यक्ति के गले में अभी “अटका” होगा | हालाँकि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया क्योंकि किसी भी तरह का चबाया गया छोटा पदार्थ का टुकड़ा कुछ दिनों में पाचन से बाहर आ जाता है | ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में एक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट रॉजर लिडल के अनुसार “ कुछ भी पेट में लम्बे समय तक नहीं रहेगा जब तक यह इतना बड़ा ना हो कि पेट से निकल ना पाए या फिर यह आंत में फँस गया हो और इस सच्चाई का सामना करें कि लोग मछलियों की हड्डियों और सिक्कों को हमेशा निगलते हैं और इसकी तुलना में च्युइंगम हल्का होता है |

मिथक : मांसपेशियां चर्बी में बदल जाती हैं अगर आप व्यायाम नहीं करते हैं
सत्य : यह दृष्तात्मक रूप से सच प्रतीत हो सकता है लेकिन जैविक और व्यवहारिक रूप से यह असम्भव है ; मांसपेशियां और वसा एक दूसरे में कभी परिवर्तित नहीं हो सकते हैं ; मांसपेशियों की कोशिकायें और वसा कोशिकायें दोनों पूरी तरह से अलग चीज़ है | इस तरह से सोचें कि मांसपेशी कठिन काम करने वाला बच्चा है और वसा आलसी बच्चा है जो अपना पूरा दिन बर्बाद करता है | चलिए , अब इसे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं ; जब आप व्यायाम करते हैं तो आपकी मांसपेशियां शरीर से अतिरिक्त वसा को खत्म करती हैं और यदि आप व्यायाम करना बंद कर देते हैं तो आपकी मांसपेशियां वसा को बढने के लिए जगह देना शुरू कर देती हैं और यह दोनों आंतरिक शरीर के कार्य हैं जो एक दूसरे से पूरी तरह अलग होते हैं ; यह बस एक मिथक है इसके बारे में सोचते हुए अपने मस्तिष्क को व्यायाम करने दें |

मिथक : कम रौशनी में पढना आपकी दृष्टि को नुकसान पहुँचाता है
सत्य : जब आप खुद को एक बेडशीट से कवर करके कम रौशनी में पढ़ना चालू करते हैं तो आपके कानों में आपकी माँ की आवाज गूंज जाती है “ अँधेरे में मत पढों वरना अंधे हो जाओगे” | ठीक है , हम साबित कर सकते हैं कि यह गलत है और हमारे पूर्वजों के अन्धविश्वास के कारण हम पर लागू होता है | क्लीवलैंड क्लिनिक कोल आई इंस्टिट्यूट के नेत्र रोग विशेषज्ञ रिचर्ड गन्स , एमडी , एफएसीएस , कहते हैं कि कम रौशनी में आँखों को ध्यान केन्द्रित करना मुश्किल हो सकता है , जो आंखों के अल्पकालिक थकान का कारण बन सकता है , लेकिन इसके कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि अँधेरे में पढना आपकी आँखों को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाता है | कम रौशनी में आप अपनी आँखों को कम बार झपकाते हैं जिससे आपके आँखों पर थकान का असर पड सकता है ; तो आप चिंता ना करें अपनी पंसदीदा बुक लें और कम रौशनी में पढना शुरू करें और तब तक पढ़ें जब तक आप सो नहीं जाते |

मिथक : शुगर बच्चों में अतिसक्रियता का कारण है
सत्य : यह एक बेहद मीठा झूठ है ; वर्षों से विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से , वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि शुगर बच्चों में अतिसक्रियता बढ़ाती है | 1982 में , नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ ने घोषणा की कि शुगर और अतिसक्रियता के बीच कोई संबंध नहीं है | एक अध्ययन में , माता-पिता को बताया गया कि उनके बच्चों को शुगर के साथ पेय दिया गया है , जब बच्चों ने पेय पीने के बाद अतिसक्रियता दिखाई तो माता-पिता ने इसका कारण शुगर को बताया | प्रयोग के अंत में , उनको बताया गया कि उस पेय में कोई शुगर नहीं थी | हालाँकि , वैज्ञानिक अध्ययनों में पता चलता है कि जब बच्चे जन्मदिन और मेले आदि में इकट्ठे होते हैं तो वो अतिसक्रिय होते हैं ; इन इवेंट्स के दौरान बच्चों को मीठा स्नैक्स और पेय ही दिया जाता है तो माता-पिता इस विषय पर सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि शुगर बच्चों में अतिसक्रियता बढ़ाती है |

मिथक : माइक्रोवेव भोजन के पोषण तत्व को खत्म कर देते हैं
सत्य : यह हमेशा से आधुनिक और पारम्परिक माताओं के बीच में “गर्म बहस” का मुद्दा रहा है और लगता है विज्ञान आधुनिक माताओं के पक्ष में है | हार्वर्ड हेल्थ पब्लिकेशंस के अनुसार , कुछ पोषक तत्व जैसे कि विटामिन सी , गर्मी के सम्पर्क में आते ही टूट जायेंगे भले ही आप माइक्रोवेव का उपयोग करें या पारम्परिक तरीके से पकायें | हालाँकि , चूँकि माइक्रोवेव खाद्य पदार्थों को जल्दी पकाते हैं , इसलिए वे उन पोषण तत्वों को नष्ट होने से बचा सकते हैं जो उच्च ताप एक्सपोजर के परिणामस्वरूप नष्ट हो सकते हैं | इसके अलावा , माइक्रोवेव खाद्य पदार्थों को पकाने में न्यूनतम पानी का उपयोग करते हैं जिससे पोषक तत्वों को संरक्षित किया जा सकता है |

मिथक : ताज़ा फल , फ्रोज़ेन फलों से बेहतर होते हैं
सत्य : क्या ? आप लोकप्रिय धारणा के कारण इस मिथक से लड़ेंगे लेकिन हम इस बारे में आपको ताज़ा परिप्रेक्ष्य देते हैं | जब कम्पनियां फ्रोज़ेन फलों को पैक करती हैं तो वो इसे तुरंत फ्रीज़ में रखती हैं जो इसके पोषक तत्वों को बनाये रखने में मदद करता है | इसके विपरीत , जब आप अपने स्थानीय विक्रेता से ताज़ा फल उठाते हैं तो आप सोचते हैं कि आप एक स्मार्ट और स्वस्थ निर्णय ले रहे हैं लेकिन वास्तव में आपको यह नहीं पता कि आप जो फल खरीद रहे हैं उसे दूर-दराज़ के खेतों से तोड़ा गया है , कारखाने में कहीं पैक किया गया और सैकड़ों किलोमीटर में पहुँचाया गया | इस यात्रा के दौरान , फल पके हुए होने के कारण , यह अपने पोषक तत्वों और एंजाइमों को खो देता है , हालाँकि अगर आपके पास सीधे पेड़ से फल खाने का विकल्प है तो इसे खाएं |

मिथक : यदि आप भोजन गिरने के 5 सेकंड के भीतर उठाते हैं भोजन बैक्टेरिया से दूषित नहीं होगा
सत्य : 5-सेकेण्ड का नियम निस्संदेह हमारे पसंदीदा मिथकों में से एक है क्योंकि यह बेहद सतही है लेकिन यह साथ ही बहुत नरकीय और चुनौतीपूर्ण भी है | एक दिन मैंने अपना डोरिटो गिरा दिया और अगले चार सेकेण्ड में उसे उठा लिया , मुझे चैंपियन की तरह महसूस हो रहा था और मैंने इसे “स्वच्छ और स्वस्थ डोरिटो” के रूप में खुद को दिया ; हालाँकि यह एक घोटाला था | मिथबस्टर्स जेमी हिनमन और एडम सैवेज के अनुसार , “अगर कुछ भी केवल कुछ मिली सेकंड जमीन या फर्श पर पड़ा रहता है तो बैक्टीरिया उसकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं” | यह कितना गंदा हो जाता है , भोजन की नमी , सतह ज्यामिति और मंजिल की स्थिति पर निर्भर करता है – समय पर नहीं | “ तो अगर अप कुछ भी 5 सेकेण्ड के अंदर उठाते हैं तो आप सुनिश्चित करते हैं कि आप खाने के साथ बैक्टीरिया का आनन्द ले रहे हैं |

“इस लेख को पढने के बाद , अपने माता-पिता से झगड़ा ना करें क्योंकि यह उनकी गलती नहीं है क्योंकि शायद उन्हें भी इन “तथाकथित तथ्यों” के सच्चाई के बारे में नहीं पता ; उन्हें इस लेख के बारे में बतायें | क्या हमसे कोई मिथक छूट गया है ? नीचे कमेंट सेक्शन में बतायें

विथ लव
टीम डॉक्सएप्प

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